Friday, 28 September 2018

माऊली

दशाक्षरी

      माऊली

आभाळागत  माया  अपार
तुळता  तुळे  नच  कदापि
प्रेमाची  वटवृक्ष  सावली
मापता  थिटे  अंकगणित
मायेचा  पदर तू  माऊली

माऊलीवीण  विश्व हे  शून्य
तिन्ही जगाचा स्वामी भिकारी
माय महिमा  अपरंपार
बाळा घडवी  विश्वमानव
शिकवोनी  जीवनसंस्कार

संस्काराची अमोल दौलत
उद्धारी  कन्यापूत्र  भूवरी
अथांग  मायेचा  हा निर्झर
फुलविण्या शैशव बगीचा
पाझरतो  चिर निरंतर

कवी - हेमंत राम  पाटील
          दहिसर, मुंबई.

No comments:

Post a Comment